हरी मटर
दालें और फलियाँ

पोषण की मुख्य बातें

कच्चाबीज
प्रति
(145g)
7.86gप्रोटीन
20.95gकुल कार्बोहाइड्रेट
0.58gकुल वसा
ऊर्जा
117.45 kcal
आहारीय फाइबर
29%8.26g
विटामिन सी
64%58mg
थायमिन (B1)
32%0.39mg
विटामिन K (फाइलोक्विनोन)
29%35.96μg
कॉपर
28%0.26mg
मैंगनीज
25%0.59mg
फोलेट
23%94.25μg
नियासिन (B3)
18%3.03mg
जिंक
16%1.8mg

हरी मटर

परिचय

हरी मटर, जिसे वैज्ञानिक रूप से पिसम सैटिवम के रूप में जाना जाता है, फलीदार पौधों के परिवार का एक प्रमुख सदस्य है। ये छोटे, गोल और हरे रंग के बीज न केवल स्वाद में मीठे होते हैं, बल्कि पोषण का एक बेहतरीन स्रोत भी हैं। सदियों से मटर मानव आहार का एक अनिवार्य हिस्सा रहे हैं, जो अपनी बहुमुखी प्रतिभा और प्राकृतिक मिठास के लिए जाने जाते हैं।

मटर की फसल को मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में उगाया जाता है, जो इसे भारत में एक प्रिय मौसमी सब्जी बनाता है। ताजी फली से निकले मटर के दानों का जीवंत हरा रंग और ताजी महक रसोई में ताजगी का अनुभव लाते हैं। विभिन्न प्रकार की मटर, जैसे कि स्नैप मटर या शेलिंग मटर, अलग-अलग पाक शैलियों में उपयोग की जाती हैं।

पाक उपयोग

हरी मटर अपनी प्राकृतिक मिठास के कारण कई व्यंजनों में मुख्य भूमिका निभाती है। इन्हें कच्चा खाने, हल्का भाप देने या सब्जियों के साथ भूनकर पकाना सबसे लोकप्रिय तरीके हैं। कम आंच पर पकाने से इनका रंग बना रहता है और स्वाद की मिठास बरकरार रहती है, जिससे ये सलाद और स्टिर-फ्राई में एक शानदार जोड़ बन जाते हैं।

मटर का उपयोग भारतीय रसोई में बहुतायत से होता है, चाहे वह शाही पनीर की ग्रेवी हो, पारंपरिक मटर पनीर हो या मसालेदार आलू-मटर की सब्जी। इसके अलावा, मटर के पराठे और खस्ता कचौड़ी जैसे व्यंजन मटर की लोकप्रियता के बेहतरीन उदाहरण हैं। ये सब्जियां, सूप और पुलाव जैसे व्यंजनों में न केवल पोषण जोड़ते हैं, बल्कि एक सुखद बनावट और रंग भी प्रदान करते हैं।

पोषण और स्वास्थ्य

हरी मटर पोषण का पावरहाउस मानी जाती है, विशेष रूप से यह फाइबर और विटामिन सी का एक उत्कृष्ट स्रोत है। उच्च फाइबर सामग्री पाचन स्वास्थ्य में सुधार करती है और तृप्ति का अनुभव देती है, जबकि विटामिन सी की उपस्थिति प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करने में सहायक है। इसके अलावा, इनमें मौजूद विटामिन के हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ये छोटे दाने फोलिक एसिड और विभिन्न बी-विटामिन का भी अच्छा स्रोत हैं, जो ऊर्जा चयापचय में मदद करते हैं। इनमें मौजूद मैंगनीज और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व शरीर के एंटीऑक्सीडेंट डिफेंस को समर्थन देते हैं। अपनी कम कैलोरी और पोषक तत्वों के घनत्व के कारण, हरी मटर संतुलित आहार का एक आदर्श हिस्सा हैं, जो समग्र शारीरिक कल्याण में योगदान देते हैं।

इतिहास और उत्पत्ति

मटर के इतिहास की जड़ें मध्य एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों तक जाती हैं, जहाँ इसे हजारों वर्षों से उगाया जा रहा है। ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि मटर का सेवन प्राचीन ग्रीस और रोम में भी होता था, जहाँ यह भोजन का एक प्रमुख आधार था। समय के साथ, इस फसल का प्रसार दुनिया के बाकी हिस्सों में हुआ और यह विभिन्न संस्कृतियों के पाक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

आधुनिक युग में, मटर की खेती ने वैश्विक कृषि में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। 19वीं सदी में ग्रेगर मेंडल द्वारा मटर के पौधों पर किए गए आनुवंशिक प्रयोगों ने आधुनिक आनुवंशिकी के विज्ञान की नींव रखी। आज, यह न केवल एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, बल्कि विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसकी एक गहरी ऐतिहासिक और शैक्षणिक प्रासंगिकता बनी हुई है।