करौंदा
हल्के सिरप मेंफल

पोषण की मुख्य बातें

डिब्बाबंदसाबुतमीठा
प्रति
(1 कप ≈ 252 g)
0.65gप्रोटीन
16.35gकार्बोहाइड्रेट
0.2gकुल वसा
ऊर्जा
73 kcal
आहारीय फाइबर
8%2.4g
कॉपर
24%0.22mg
विटामिन सी
11%10mg
मैंगनीज
7%0.18mg
राइबोफ्लेविन (B2)
4%0.05mg
पैंटोथेनिक एसिड (B5)
2%0.14mg
आयरन
1%0.33mg
थायमिन (B1)
1%0.02mg
पोटेशियम
1%77mg

स्रोत: USDA FoodData Central

करौंदा

परिचय

करौंदा, जिसे कई क्षेत्रों में करवंदा के नाम से भी जाना जाता है, एक छोटा और चटपटा फल है जो अपनी विशिष्ट अम्लीय प्रकृति के लिए प्रसिद्ध है। यह फल अपने छोटे आकार और आकर्षक रूप के कारण न केवल बागों की शोभा बढ़ाता है, बल्कि स्वाद की दुनिया में भी एक विशेष स्थान रखता है। वानस्पतिक रूप से यह कई झाड़ीदार पौधों पर फलता है, जो भारतीय जलवायु और मिट्टी की विविधता में पनपने के लिए अनुकूल होते हैं।

इन फलों की बनावट और रंग में विविधता देखने को मिलती है, जो कच्चे अवस्था में हरे और पकने पर गहरे बैंगनी या लाल रंग में बदल जाते हैं। इनकी बनावट थोड़ी सख्त होती है, जो इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में उपयोग करने के लिए उपयुक्त बनाती है। मानसून के दौरान इनका आगमन भारतीय बाजारों में एक उत्साह की तरह होता है, जहाँ लोग इनके तीखेपन और चटपटेपन का आनंद लेने के लिए उत्सुक रहते हैं।

पाक उपयोग

करौंदे का पाक उपयोग मुख्य रूप से इसकी खटास को संतुलित करने पर केंद्रित होता है। इसे अक्सर अचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ सरसों के तेल और मसालों के साथ इसका मेल एक क्लासिक भारतीय स्वाद प्रदान करता है। इसके अलावा, इसे पकाकर या उबालकर चटनी के रूप में भी परोसा जाता है, जो मुख्य भोजन के साथ स्वाद को दोगुना कर देती है।

मिठाई और संरक्षित खाद्य पदार्थों में, करौंदे को चीनी के साथ पकाकर मुरब्बा या जैम तैयार किया जाता है, जिससे इसकी स्वाभाविक तीक्ष्णता एक मीठे और चटपटे अनुभव में बदल जाती है। यह संयोजन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो फलों के प्राकृतिक गुणों को एक मीठे रूप में लेना पसंद करते हैं। इसके सूखे हुए रूप को विभिन्न व्यंजनों में एक खट्टे मसाले के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है, जो खाने में गहराई और एक विशिष्ट तीखापन जोड़ता है।

पोषण और स्वास्थ्य

करौंदा स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और स्वस्थ त्वचा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही, इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो पाचन तंत्र को सुचारू रखने और पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है।

इन मुख्य गुणों के अलावा, करौंदा में मैंगनीज और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो शरीर की विभिन्न चयापचय क्रियाओं और हड्डियों के स्वास्थ्य को समर्थन देते हैं। इनकी कम कैलोरी और उच्च फाइबर सामग्री इन्हें एक पौष्टिक विकल्प बनाती है, जिसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हो सकता है। इनमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भी मदद करते हैं, जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।

इतिहास और उत्पत्ति

करौंदे का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप से गहरा जुड़ा हुआ है, जहाँ इसे सदियों से पारंपरिक भोजन और लोक चिकित्सा का हिस्सा माना गया है। जंगली और घरेलू दोनों रूपों में उगने के कारण, यह फल ग्रामीण और शहरी समुदायों की खान-पान परंपराओं का अभिन्न अंग रहा है। इसकी बहुमुखी प्रतिभा ने इसे भारतीय घरों में एक प्रमुख सामग्री के रूप में स्थापित किया है।

समय के साथ, करौंदे की खेती का विस्तार हुआ है और यह अपने औषधीय और पाक गुणों के कारण व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ है। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में, इसे शरीर को तरोताजा करने और पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण फल माना गया है। आज यह न केवल भारत के विभिन्न राज्यों के व्यंजनों में अपनी पहचान बनाए हुए है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसे इसके अनोखे स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए सराहा जाने लगा है।